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Sunday, June 24, 2018

इंदिरा गांधी का ये फैसला भारत की राजनीति में काला दिन माना जाता है


जून महीना तपती गर्मी के अलावा भारत के राजनीतिक इतिहास का भी एक यादगार दिन है। इस महीने की 25 तारीख को काले दिन के रूप में जाना जाता है, क्योंकि सन् 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने देश में निंरकुश आपातकाल की घोषणा की थी। 25 जून 1975 की शाम रामलीला मैदान में जयप्रकाश नारायण ने विशाल जनसभा की थी, जनसभा की भारी भीड़ देखकर इंदिरा को अपनी सरकार लड़खड़ाती दिख रही थी।

देश के महामहिम राष्ट्रपति फ़ख़रूद्दीन अली खान ने देर रात…
देश के महामहिम राष्ट्रपति फ़ख़रूद्दीन अली खान ने देर रात आपातकाल के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए।  जिसके बाद 26 जून की सुबह इंदिरा ने सभी केबिनेट मंत्रियों की बैठक की और आपातकाल के बारे में बताया। बैठक में मौजूउ गृहसचिव खुराना ने सभी को घोषणा पत्र सुनाया उसके बाद गृह राज्यमंत्री ओम मेहता ने सभी मंत्रियों को आंतरिक आपातकाल के संदर्भ में समझाया गया। मंत्रिमंडल के लगभग सभी मंत्रियों ने इंदिरा के इस फैसले का समर्थन किया लेकिन स्वर्ण सिंह ने इसका विरोध किया तो इंदिरा ने औकात दिखाकर चुप करा दिया। जिसके बाद इंदिरा ने आपातकाल की घोषणा करते हुए आकाशवाणी पर कहा कि – भाईयों और बहनों राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है। इससे आंतकित होने की कोई आवश्यकता नहीं हैं।
आपाताकाल के दौरान इंदिरा सरकार ने सभी मीडिया व समाचार पत्रो के…
आपातकाल का विरोध करने वाले अनेक राजनेताओं को हिरासत मे बंद कर दिया गया था। जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मोरारजी देसाई, लालू प्रसाद यादव, चरण सिंह, नीतीश कुमार, मधु दंडवते आदि तमाम नेताओं ने विरोध किया। इंदिरा सरकार ने आरएसएस के तत्कालिन सरसंघचालक बालासाहब देवरस, वेकैंया नायडू, अरूण जेटली, रामविलास पासवान, प्रकाश जावड़ेकर, और पीएम मोदी को भी न्यायिक हिरासत मे भेजा। आपाताकाल के दौरान इंदिरा सरकार ने सभी मीडिया व समाचार पत्रो के प्रकाशन पर रोक लगा दी थी। इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी ने पुरूषो की जबरन नसबंदी कराई। इस दौरान संविधान की धारा 21 तक निलंबित कर दी, जिसमे हर नागरिक को जीवन जीने का अधिकार था। बड़ी हैरानी की बात है कि जिनके पिता जवाहर लाल नेहरू ने संविधान का दीपक जलाकर देश को रोशन किया था। उन्ही की बेटी ने उस दीपक को अपनी तानाशाही के चलते बुझा दिया।
19 महीने चली इंदिरा की तानाशाही के बाद…
देश के लोकतंत्र को मानो कठपुतली की तरह नचाया जा रहा हो। आपातकाल के खलनायक संजय गाँधी ने अपनी माँ की सत्ता का दुरूप्रयोग कर देश के कानून पर घातक हमला किया। उस दौरान तो मानो देश की जनता को सांस लेने के लिए भी इंदिरा की अनुमति चाहिए थी । खत्म होती मानवता और न्यायिकता के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले हज़ारो राजनीतिज्ञों को मीसा एक्ट के तहत हिरासत में भेज दिया गया। लोकतंत्र इंदिरा और संजय गाँधी का बंधक बन गया था। 19 महीने चली इंदिरा की तानाशाही के बाद 18 जनवरी 1977 को इंदिरा ने आपातकाल को खत्म करने का निर्णय लिया और सभी राजनेताओ को जेल से रिहा कर देश में चुनाव कराया।

Wednesday, June 20, 2018

नेता मस्त और जनता पस्त : मज़ाक बनती जा रही है गठबंधन की राजनीति

 स्वार्थ का गठबंधन 
बीजेपी और कांग्रेस का विरोध पर सहययोगी दलो का समर्थन


राजनीति का मतलब होता है ऐसी नीतियों के आधार पर राज करना जिससे समाज के जन जन का विकास हो सके। परंतु वर्तमान राजनीतिक प्रणाली को देखकर लगता है कि तमाम राजनीतिक दलो की विचारधाराओं का अस्तिव ही खत्म हो गया है। इसका उदाहरण हम बीते कई दिनो से दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शन से लगा सकते है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल अनिल बैजल के खिलाफ भूख हड़ताल शुरू की थीए तो उनके इस विरोध को कई विपक्षी दलों के दिग्गज़ नेताओं ने समर्थन दिया।

कांग्रेस और बीजेपी का विरोध पर सहयोगियी पार्टियों का समर्थन 
कांग्रेस के सहययोगी दलो और बीजेपी सांसद का खुला समर्थन 
 कांग्रेस और भाजपा दोनो ही राष्ट्रीय राजनीतिक दलो की सूची में शामिल हैं। दोनो ही राजनीतिक दल केजरीवाल की इस हड़ताल का विरोध कर रहे है। लेकिन सबसे दिलचस्पी की बात ये कि  इन दोनो राजनीतिक दलो के सहयोगी दल केजरीवाल की इस हड़ताल का खुला समर्थन कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी की सहयोगी पार्टियां केजरीवाल के इस विरोध का समर्थन कर रही है उसमे पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांगे्रस (टीएमसी ) कर्नाटका की जनता दल ( जेडीएस ) कम्यनिस्ट पार्टी आॅफ इंडिया ( माक्र्सवादी ) और झारखण्ड मुक्ति दल ( जेएमडी ) शामिल है। वहीं भारतीय जनता पार्टी जो कि वर्तमान समय में सबसे लोकप्रिय पार्टी की श्रेणी में शामिल है। पीएम मोदी केजरीवाल के इस गतिरोध पर चुप्पी साधे हुए है वहीं उनकी पार्टी के दिल्ली के कद्दावर नेता सीएम कार्यालय के बाहर बैठकर धरना दे रहे है। लेकिन भाजपा के सांसद और पूर्व कैबिनेट मंत्री शत्रुघन सिन्हा केजरीवाल के समर्थन मे ट्वीट कर रहें है। भाजपा नेताओं के साथ उनके सहयोगी दलो के नेताओं ने भी केजरीवाल के विरोध का समर्थन करना शुरू कर दिया हैं। शिवसेना प्रमुख उध्दव ठाकरे और जनता दल यूनाइटेड से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी केजरीवाल के पक्ष में बात कही।

विपक्षी पार्टियों को सरकार बनाने से रोकना होता है मकसद
विभिन्न विचाधाराओं और सिंद्धातो के बावजूद जब राजनीतिक पार्टियां अपने विपक्षी को सरकार बनाने से रोकने के लिए मिलती है। तो लगता है दोनो के बीच का ये गठबंधन एक मजबूत सरकार बनाकर जनता का विकास करेगा। लेकिन इन सब बातों को देखकर तो यही लगता है कि राजनीतिक पार्टियां सरकार बनाने के लिए जोड़ . तोड तो आसानी से कर लेती है ए लेकिन आपसी संचार को स्थापित करने में असफल रहती है। राजनीतिक दल अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए दूसरी पार्टी की विचारधाराओं से गठबंधन करके एक दूसरे की जरूरतो को पूरा तो कर लेते है पर देशहित के मुद्दो पर एकता नही दिखाते है। 

Monday, June 18, 2018

AC कमरों में नेताओ का धरना ड्रामा : जनता बदहाल


AC कमरों में नेताओ का धरना ड्रामा : जनता बदहाल

पानी लेने के लिए टैंकर के ऊपर चढ़ी दिल्ली की आम जनता 
इन दिनो देश की राजनीति में सियासी सरगर्मी मची हुई है। पकौड़ा पाॅलिटिक्स के बाद अब धरना पाॅलिटिक्स का प्रचलन आ गया है। हमारे देश के जनप्रतिधि जनता की समस्या का निवारण करने की बजाए आलिशान कमरो में बैठकर धरना दे रहें है। देश की राजधानी दिल्ली जहां आम जनता पानी और बिजली की समस्या को झेल रही है। वहीं सभी राजनीतिक दल आरामदायक कमरे मंे बैठकर धरना दे रहें हैं। नेता धरने को अपनी मशाल बनाकर दिल्ली की जनता को अंधकार की दुनिया में बैठाए हुए है। राज्य के मुखिया अरविंद केजरीवाल एलजी कार्यालय पर और बीजेपी के नेता सीएम कार्यालय के एसी वाले कमरो में बैठकर धरना दे रहें है। कांग्रेस के नेता दिल्ली सरकार के खिलाफ जल सत्याग्रह कर रहे है। जब सभी दल एक दूसरे पर एसी कमरो में धरने पर बैठकर आरोप लगाते रहेंगें तो धूप में तपती जनता की समस्या का समाधान कौन करेगा।

राजनीति का मजा़क बनता जा रहा है
सरल शब्दो में राजनीति का अर्थ होता है ऐसी नीतियों के आधार पर राज़ करना , जिससे जन जन का विकास हो सके। राजनीति समाज में हो रही समस्याओं के निवारण की आवाज़ बनने के लिए होती हैं। लेकिन आज के समय में राजनीति का स्तर गिरता जा रहा है कि मानो लोगो को राजनीति एक दलदल सी लगने लगी है। एक ऐसा दलदल जिसमें एक बार कोई फंस जाए तो निकलना मुश्किल हो जाता है।

नेताओं की ही नही सुनी जा रही बात
राजनीति के भी कई मायने हो गए है, जिन नेताओं को हम अपना जनप्रतिनिधि बनाकर सदन में भेजते है। ताकि वो हमारी समस्याओं की बुलंद आवाज़ बनकर उसका समाधान करवाएं। लेकिन आज के समय में राजनेता अपनी समस्या को सुनाने के लिए एसी वाले कमरे में बैठकर धरना दे रहे है और बेबस जनता समस्या के समाधान करने की गुहार लगा रही है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री की बात को नज़रअंदाज
देश की राजधानी दिल्ली के मुख्यमंत्री की बात को नज़रअंदाज किया जा रहा है। आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री पिछले आठ दिनो से उपराज्यपाल के कार्यालय पर भूख हड़ताल कर रहे है। केजरीवाल की मांग प्रशासनिक अधिकारियांे की हड़ताल खत्म करने और दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने को लेकर है। केजरीवाल के इस आंदोलन का विपक्षी पार्टियों के नेताओं के साथ - साथ चार प्रदेशो के मुख्यमंत्रियो ने भी समर्थन किया। बीजेपी के तमाम दिग्गज़ नेता दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर धरना दे रहे है उनकी मांग दिल्ली की जनता हो रही पानी और बिजली की समस्या को दूर करने को लेकर है। बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सरकार को भंग करके दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की। सभी नेता एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करके एक दूसरे को सात्वना दिए जा रहे है लेकिन उनकी मांगो को कोई सुन नही रहा है।



Sunday, June 17, 2018

आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओ ने मंडी हाउस से शुरू किया विरोध प्रदर्शन



आप कार्यकर्ताओं ने मंडी हाउस में किया विरोध प्रदर्शन
केजरीवाल के अनशन का एक सप्ताह.....

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने 3 मंत्रियो के साथ मिलकर पिछले सात दिनो से दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय पर  अनशन कर रहे है। केजरीवाल की ये भूख हड़ताल दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने को लेकर और पिछले तीन महीनो से चल रही प्रशासनिक अधिकारियों की हड़ताल को खत्म करने को लेकर है।


इन चार राज्यो के मुख्यमंत्रियो ने किया केजरीवाल के अनशन का समर्थन.....

प्रेस वार्ता करके चारो मुख्यमंत्रियो ने किया
 केजरीवाल के अनशन का समर्थन 
आज राष्ट्रपति भवन में पीएम मोदी की अध्यक्षता में  नीति आयोग की बैठक हुई, जिसमे चार प्रदेशो के मुख्यमंत्रियो ने केजरीवाल के अनशन का सर्मर्थन किया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ,कर्नाटक के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ,आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू  और केरल के मुख्यमंत्री पी.  विजयन ने मिलकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलकर इस समस्या सुलझाने की मांग की।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत चारो राज्यों के मुख्यमंत्रियो ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल से उपराज्यपाल के कार्यालय पर मिलने का प्लान बनाया था। जिसके बाद उन्होंने उपराज्यपाल अनिल बैजल से चिट्ठी लिखकर अनुमति मांगी थी। पर उपराज्यपाल ने मिलने की अनुमति को स्वीकृति प्रदान नहीं की। जिसके बाद ममता बनर्जी ने इसे संवैधानिक संकट बताया। इसके बाद चारो मुख्यमंत्री केजरीवाल के परिवार वालो से मिलने उनके घर पहुंचे। केजरीवाल ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएम के आदेश पर एलजी ने नहीं दी मिलने की अनुमति।

आप नेताओं ने किया मंडी हाउस से विरोध मार्च.......

आम आदमी पार्टी के संयोजक केजरीवाल के अनशन को आज सात दिन हो चुके है, लेकिन अभी तक उनकी कोई भी मांग पूरी नहीं की गई है। इस बात से नाराज़ होकर केजरीवाल ने रविवार को पीएम आवास का घेराव करने की चेतावनी दी थी। जिसके बाद आज शाम 5ः30 बजे से सैकड़ो की तादात में सड़को पर उतरे आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ सीपीएम पार्टी के सीताराम येचुरी ने भी हिस्सा लिया। ये विरोध मार्च मंडी हाउस से पीएम आवास तक निकाली जा रही है। दिल्ली के डीसीपी ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने पीएम आवास के बाहर विरोध मार्च करने की अनुमति नहीं ली हैं।

बीजेपी नेताओं ने कहा जनता के साथ मजाक कर रही आप सरकार.......


दिल्ली में केजरीवाल के धरने के दो दिन बाद ही बीजेपी के नेताओं ने दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय पर धरना देना शुरू कर दिया था। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि केजरीवाल सरकार दिल्ली की जनता के साथ मज़ाक कर रही है। दिल्ली में हो रही बिजली- पानी की समस्या के समाधान के बजाए सरकार एलजी हाउस पर पिछले सात दिनो से धरना दे रही है। बीजेपी नेताओ ने कहा जब तक केजरीवाल दिल्ली की जनता को हो रही पानी की समस्या को नहीं सुलझा देता तब तक उनका भी हड़ताल जारी रहेगी। मुख्यमंत्री कार्यालय पर बीजेपी के नेताओ के साथ आम आदमी पार्टी के बागी विधायक कपिल मिश्रा भी धरने पर बैठे है।

Saturday, June 16, 2018

केजरीवाल के मंत्री का अनशन घोटाला, खाली पेट बढ़ा इतना किलों वजन

दिल्ली: दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय पर पिछले छह दिनों से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने 4 मंत्रियो के साथ मिलकर अनशन कर रहे है। केजरीवाल की ये भूख हड़ताल दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने को लेकर और पिछले तीन महीनों से चल रही प्रशासनिक अधिकारियों की हड़ताल को खत्म करने को लेकर है।



मंत्रियों का स्वास्थ चेकअप किया गया तो  परिणाम चौंकाने वाला निकला…



हैरान करने वाली बात ये है कि जब शुक्रवार दोपहर मंत्रियों का स्वास्थ चेकअप किया गया तो उसके परिणाम चौंकाने वाले थे। धरने पर बैठे सरकार के काबीना मंत्री सत्यैंद्र जैन का वजन 1.2 किलोग्राम बढ़ा पाया गया। जिसके बाद से ही केजरीवाल की भूख हड़ताल पर सवाल उठने शुरू हो गए। इतने दिनों से अनशन पर बैठने के बाद भी केजरीवाल के मंत्री सत्यैंद्र जैन का 1.2 किलोग्राम वजन कैसे बढ़ गया।




वजन में 1200 ग्राम का इजाफा…


दरअसल गुरूवार शाम तक सत्यैंद्र जैन का वजन 80 किलो 300 ग्राम था लेकिन जब शुक्रवार को
उनका चेकअप किया गया तो उनके वजन में 1200 ग्राम का इजाफा पाया गया। जिसके बाद से ही विपक्षी पाटिर्यों ने के
जरीवाल सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिया।आप सरकार के बागी विधायक कपिल मिश्रा ने सत्यैंद्र जैन के वजन बढ़ने को लेकर आप सरकार के खिलाफ दो ट्वीट किए। मिश्रा ने सत्यैंद्र जैन के साथ इस भूख हड़ताल का समर्थन कर रहे दूसरी पार्टी के नेताओं पर भी निशाना साधा। ट्वीट में सत्यैंद्र के वजन बढ़ने को लेकर कपिल ने प्रहार करते हुए लिखा कि सत्यैंद्र जैन भूख हड़ताल में भी घोटाला कर रहे हैं।



विपक्षी पार्टियों ने भी किया केजरीवाल का समर्थन…


केजरीवाल के इस आंदोलन में उन्हें विपक्षी पार्टियों के नेताओं का भी समर्थन मिल रहा हैं। केजरीवाल के अनशन को बीजेपी के बागी नेता यशवंत सिन्हा , पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी समर्थन दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सांसद शत्रुघ्न सिन्हा दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल के समर्थन में उतर आए हैं। उन्होंने आप नेताओं द्वारा दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का समर्थन किया है और कहा है कि बीजेपी भी लंबे समय से यही मांग करती रही है, इसलिए केंद्र सरकार को चाहिए कि वो जनहित को ध्यान में रखते हुए दिल्ली को पूर्ण राज्य घोषित करे।




Friday, June 15, 2018

केजरीवाल का पीएम को पत्र





दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बीते पांच दिनो से एलजी निवास पर धरना दे रहे है। सीएम केजरीवाल के साथ दिल्ली सरकार के 4 मंत्रीगण भी अनशन पर बैठे है। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग और पिछले तीन महीनो से चल रही आईएएस अफसरों की हड़ताल को खत्म करने को लेकर केजरीवाल दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय पर धरना दे रहे है। केजरीवाल ने कहा कि ये धरना किसी निजी स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि दिल्ली की आम जनता की भलाई के लिए है। केजरीवाल के साथ दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया, ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल राय और काबीना मंत्री सत्यैंद्र कुमार जैन धरना दे रहें है। केजरीवाल ने भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि नौकरशाहो की हड़ताल आप सरकार के कामकाज के बीच बाधक बन रही है जिससे आम जनता को काफी कठिनाईयो का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों का मामला कंेंद्र सरकार से जुड़ा है, केजरीवाल ने खुद पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस जटिल समस्या पर हस्तक्षेप करने की अपील की। और कहा कि केन्द्र सरकार प्रशासनिक अधिकारियों की हड़ताल को खत्म करने के निर्देश दें।   

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने उपराज्यपाल अनिल बैजल को इस संबन्ध में समाधान करने को लेकर पत्र भी लिखा था, परंतु जिसका कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर इस विषय मंे कारवाई करने की मांग की जिसके बाद राजनाथ सिंह ने उपराज्यपाल अनिल बैजल से बात कर उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया।








Thursday, June 14, 2018

उत्तराखण्ड कैबिनेट बैठक में लिए गए अहम फैसले



सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक
उत्तराखण्ड के सचिवालय में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसलों पर मोहर लगी। त्रिवेंद्र सरकार की इस बैठक मे 17 प्रस्ताव आए जिसमें से 14 प्रस्तावो को पारित किया गया। इस बैठक में सरकार ने होमगार्डाें का मानदेय 400 से बढ़ाकर 450 कर दिया है। बैठक में सात लाख स्कूली छात्रों को एनसीआरटी किताबे उपलब्ध कराने के फैसले पर सरकार ने मोहर लगाई और कहा कि छात्रो को जुलाई महीने तक किताबे उपलब्ध करा दी जाएंगी। किताबो की छपाई के लिए सरकार यूपी के प्रकाशको का सहारा लेगी। वही बैठक मे पुलिस असाधारण पेंशन नियमावली में संशोधन पर मोहर लगाते हुए असाधारण पेंशन के लिए पात्रता तय की। कैबिनेट में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर होने वाले पीएम मोदी के कार्यक्रम को लेकर आठ समितियों केे गठन को स्वीकृति प्रदान की गई। एफआरआइ में होने वाले योग कार्यक्रम के लिए 25 एंबुलेंसो का भी इंतजाम किया जाएगा। सीएम त्रिवेंद्र ने मंत्रियों को बारिश से निपटने के लिए भी पर्याप्त इंतजाम करने के निर्देश दिए। बैठक में बद्रीनाथ में यूपी पर्यटन विभाग को 401 हेक्टेयर जमीन देने को मंजूरी मिल गयी है। त्रिवेंद्र सरकार ने किसानो को राहत देते हुए गेंहू का समर्थन मूल्य 1735 रूपये प्रति कुंतल करने का ऐलान किया।



Sunday, June 10, 2018

मशहूर लोकगायक कार्की की मौत का शोक मना रहा उत्तराखण्ड


रविवार को नम आंखो से मशहूर लोकगायक परविंदर सिंह
 स्वर्गीय परविंदर सिंह कार्की उर्फ  पप्पू कार्की 


कार्की उर्फ “ पप्पू कार्की “ को दी गई अंतिम विदाई। उत्तराखण्ड के मशहूर युवा लोकगायक पप्पू कार्की के अंतिम दर्शन करने के लिए रामगंगा नदी घाट पर उनके हज़ारो प्रशसंक मौजूद रहे। उत्तराखण्ड के ध्रुव तारा कहे जाने वाले पप्पू कार्की की मौत से देवभूमि के लोगो में शोक की लहर है। अपनी आवाज का जादू बिखेरने वाले कार्की ने उत्तराखण्ड का सम्मान देश के साथ साथ विश्व के अन्य देशों में भी बढ़ाया था। उनकी आकस्मिक मृत्यु होने से समस्त उत्तराखण्ड वासियों सदमें मे है। हलद्वानी के बहुत से व्यापारियों ने बाज़ार बंद रखकर कार्की की मौत का शोक बनाया। दरअसल ये दर्दनाक सड़क हादसा शनिवार शाम को हल्द्वानी के काठगोेदाम थाना क्ष़्ोत्र से 35 किमी दूर हैड़ाखान मार्ग मुरकुड़िया गांव पटवारी चैकी के पास हुआ था। इस हादसे में पप्पू कार्की समेत दो अन्य लोगो की भी मौत हो गई थी। आपको बता दे कि पप्पू कार्की मौत से पहले नैनीताल के गौनिहार में रातभर एक स्टेज शो किया था। इस हादसे से समस्त उत्तराखण्ड वासियों मे सन्नाटा का माहोल है। प्रदेश के मुख्यमंत्री  त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी ट्वीट करके पप्पू कार्की के निधन पर शोक जताते हुए उनकी आत्मा की शांति की कामना की।



Saturday, June 9, 2018

गुजरात के बाद राजस्थान के विसं चुनाव में धमाल मचाएगी ये तिकड़ी

गुजरात के बाद राजस्थान के विसं चुनाव में धमाल मचाएगी ये तिकड़ी

हार्दिक, अल्पेश और जिग्नेश ने शुरू की 
राजस्थान विस चुनाव की तैयारी । 
विधानसभा चुनाव से पूर्व राजस्थान की सियासत में नया मोड़ आ गया है़। राजस्थान विस चुनाव से पूर्व गुजरात के तीन युवा नेता वहां के चुनावी समीकरण बदलने मे जुट गए है। पिछले कुछ दिनो से ये तीनो युवा नेता राजस्थान मे सक्रिय रूप से कार्य करते नज़र आ रहे है। गुजरात के पाटीदार आंदोलन से निकले हार्दिक पटेल, गुजरात से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी और पिछड़े वर्ग के नेता अल्पेश ठाकुर राजस्थान के विंस चुनाव मे बीजेपी को कड़ी टक्कर देने में जुट गए है।  
हार्दिक पटेल राजस्थान के उदयपुर संभाग मे सक्रिय रूप से लोगो के 
बीच नज़र आ रहे है। हार्दिक की रणनीति पाटीदार और गुर्जर समाज को एकजुट करने की है। इस बीच हार्दिक लगातार गुर्जर नेताओं के संपर्क में है। कांग्रेस के पूर्व विधायक पुष्कर डांगी भी हार्दिक की मदद करने में जुटे है।
दलित नेता के रूप में उभरे गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी की नज़रे भी राजस्थान के दलित वोट बैंक पर हैं वहीं अल्पेश की नज़रे पिछड़े समुदाय के वोटरो पर है। पिछले तीन महीनो में जिग्नेश राज्य की 17 विधानसभाओं का दौरा कर चुके हैं। इनके दौरे की खास बात ये है कि इन्होने 34 अनुसूचित विस क्षेत्रों में दलित समुदाय के युवाओं की एक टीम का गठन किया है जोकि विस चुनावो के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।      

कांग्रेस भी दे रही कड़ी टक्कर 


जनता को संबोधित करते कांग्रेस प्रदेश 
अध्यक्ष सचिन पायलट । 
इस बार के चुनाव में  कांग्रेस  से बीजेपी को बड़ा खतरा हो सकता है।कांग्रेस पार्टी लगातार बीजेपी के लिए मुश्किल हालात पैदा करने मेें जुटी हुई है, गौरतलब है कि फरवरी में हुए दो लोकसभा व एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी को हार का स्वाद चखाया था। राजस्थान की अजमेर व अलवर लोकसभा सीट मे बीजेपी के उम्मीदवार कांग्रेस के प्रत्याशियों से भारी मतो से हारे। राजस्थान कांगे्रस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने पूरे प्रांत में कांग्रेस के प्रत्येक विस क्षेत्र में जातिय समीकरण के आधार पर रणनीति बनाना शुरू कर दिया है।     

मोदी के विकास रथ को रोक पाएंगे ये तीनो युवा


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विकास रथ पूरे देश में बीजेपी के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है, मोदी और अमित शाह की कूटनीतिक रणनीति के कारण ही बीजेपी ने देश ऐसे बहुत से राज्यों में सरकार बनाई जहां बीजेपी अल्पसंख्यक पार्टी के रूप में थी। इन तीन युवा नेताओं ने गुजरात में बीजेपी के विकास रथ को रोकने की पूरी ज़ोर आज़माया कोशिश की थी, लेकिन सफल नहीं हो पाए थे। गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद ये तिकड़ी राजस्थान में धमाल मचा पाएगी। सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या राजस्थान की जनता इन बाहरी चेहरो की बातों से प्रभावित होेकर आगामी विस चुनावो में बीजेपी के खिलाफ मतदान करेगी।



देहरादून मे मोदी, कोटा में बाबा रामदेव करेंगे योग

देहरादून मे मोदी, कोटा में बाबा रामदेव करेंगे योग 



उत्तराखंड : 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में देहरादून के एफआरआई मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजस्थान के कोटा मे योग बाबा रामदेव करेंगे योग। कार्यक्रम की महत्वता को देखते हुए उत्तराखण्ड की सरकार और तमाम प्रशासनिक अधिकारी कार्यक्रम को सफल बनाने के निंरतर प्रयास में जुटे हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कोटा में योग करने की बात को लेकर गुरूवार को केंद्रीय राज्यमंत्री आयुष (स्वतंत्र प्रभार) श्रीपद येसो नाइक ने कहा कि प्रधानमंत्री देहरादून में होने वाले मुख्य कार्यक्रम में मौजूद रहंेगे। योग गुरू बाबा रामदेव कोटा में होने वाले कार्यक्रम में उपस्थित रहकर कोटा के साथ दो से ढाई लाख लोग योग कराएंगे। रामदेव के साथ राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी इस योग शिविर में मौजूद रहेंगी।

देहरादून में होने वाले कार्यक्रम की गंभीरता को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियां काफी जोरो-शोरांे से चल रही हैं। इस कार्यक्रम को लेकर देवभूमि के लोगो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ योगा करने की जिज्ञासा हैं। लोगो के मन में उत्साह, उमंग और उत्साह की भावना है। इसलिए गुरूवार को देहरादून के ओएनजीसी अंबेडकर स्टेडियम में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में हुए कर्टन रेसर कार्यक्रम मे योग गुरू बाबा रामदेव के साथ राज्यपाल कृष्णकांत पाल, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत , केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री श्रीपद येसो नाइक समेत कई गणमान्य लोगो ने किया योगा।

योगी आदित्यनाथ के संघर्षमय जीवन की कहानी



सूबे के मुखिया के जीवन के जीवन से जुड़ी कुछ खास जानकारियां

आज हम आपको उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री और गोरखपुर के पूर्व सांसद योगी आदित्यनाथ के जीवन से जुड़े कुछ ऐसे वाख्या बताएंगे जिन्होने उनके जीवन को बदल दिया। सरलता और सादगी से जीवन जीने वाले योगी आदित्यनाथ का जन्म 05 जून 1972 को उत्तराखण्ड के पौड़ी जिले की यमकेश्वर तहसील के पंचुर गांव में हुआ था। योगी गढ़वाली राजपूत परिवार से थे। योगी आदित्यनाथ का वास्तविक नाम अजय सिंह बिष्ट है। इनके पिता आनंद सिंह बिष्ट वन विभाग में रेंजर थे और माता सावित्री देवी गृहणी। इनके माता -पिता की सात संताने थी जिसमे योगी पांचवी संतान हैं।

योगी ने किन किन स्कूला व विश्वविद्यालयों में की पढ़ाई

योगी की प्रांरभिक शिक्षा टिहरी के गजा स्थानीय स्कूल से हुई जहां से इन्होंने दसवीं तक ही शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद सन् 1989 में ये ऋषिकेश आ गए जहां श्री भरत मन्दिर इण्टर कॉलेज से इन्होंने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। सन् 1992 में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित में बीएससी की परीक्षा पास की। कोटद्वार में रहने के दौरान इनके कमरे से सामान चोरी हो गया था जिसमें इनके सनत प्रमाण पत्र भी थे। इस कारण से गोरखपुर से विज्ञान स्नातकोत्तर करने का इनका प्रयास असफल रह गया। इसके बाद इन्होंने ऋषिकेश में पुनः विज्ञान स्नातकोत्तर में प्रवेश तो लिया लेकिन राम मंदिर आंदोलन का प्रभाव और प्रवेश को लेकर परेशानी से उनका ध्यान अन्य ओर बंट गया। 1993 में गणित में एमएससी की पढ़ाई के दौरान गुरु गोरखनाथ पर शोध करने ये गोरखपुर आए एवं गोरखपुर प्रवास के दौरान ही ये महंत अवैद्यनाथ के संपर्क में आए थे जो इनके पड़ोस के गांव के निवासी और परिवार के पुराने परिचित थे। अंततः ये महंत की शरण में ही चले गए और दीक्षा ले ली।

कैसे इनका नाम योगी पड़ा

योगी आदित्यानाथ के नाम को लेकर काफी सरगर्मी भी रहती है, दरअसल योगी का वास्तविक नाम अजय सिंह बिष्ट है। इनका नाम योगी पढ़ने के पीछे भी एक कहानी है, आपको बता दे कि जब योगी अपना घर बार छोड़ के गोरखपुर के गोरखनाथ मठ में आए थे। महज 22 वर्ष की उम्र इनको मंहत अवैद्यनाथ ने अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया, जिसके बाद से ही इन्हे योगी के नाम से जाना जाने लगा।

योगी और भगवा रंग

भगवा या केसरिया रंग सूबे के मुख्यमंत्री को बहुत ही पसंद है। इसका पता उनके वस्त्रो से साफ पता चलता है। इतने बड़े राज्य के मुख्यमंत्री होने के बावजूद भी योगी रोज़ाना भगवा रंग के वस्त्रों को धारण करके सभी कार्य करते हैं। यूपी के मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी ने यूपी के अधिकतर जगहों को भगवा रंग की चादर पहना दी है। 

योगी को क्या है पसंद

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बचपन पहाड़ो मे ही बीता है, योगी को तैराकी में काफी दिलचस्पी है। बचपन से ही योगी अपने गांव पंचुर की नदियों में तैरने का शौक रखते थे। तैराकी के अलावा योगी को बैडमिटंन खेलना व पशुओं के साथ बातचीत करने में इनकी मुख्य अभिरूचि है। खाने मे इन्हें गाहद पंसद है, जोकि पर्वतीय क्षेत्रों में बनाया जाता हैं।

कैसे हुआ योगी का राजनीतिक गलियारो में प्रवेश


योगी आदित्यनाथ का राजनीति के गलियारों मे प्रवेश सन् 1990 में हुआ। जब इन्होंने अयोध्या राम मंदिर आंदोलन मे प्रतिभाग करने के लिए अपना घर - बार छोड़ दिया था। इसके बाद जब इन्होंने 1998 में 26 वर्ष की आयु में पहली बार बारहवी लोकसभा के लिए गौरखपुर सीट से चुनाव लड़कर  के सबसे युवा सांसद चुने गए । योगी ने हिन्दु युवा वाहिनी और युवा संगठन संस्था की स्थापना की। 12 सितंबर 2014 को गोरखनाथ मंदिर के महन्त अवैद्यनाथ जी के ब्रह्मलीन होने के बाद इन्हें यहाँ का महंत बनाया गया। मंहत बनने के 2 दिन बाद इन्हें नाथ पंथ के पारंपरिक अनुष्ठान के अनुसार मठ का पीठाधीश्वर बनाया गया।
उत्तर प्रदेश 2017 विधानसभा चुनावो मे भारतीय जनता पार्टी की पूर्णता बहुमत साबित होने के बाद केंद्रीय विधान मण्डल में यूपी की बागडोर किसके हाथों में देनी है इसको लेकर सरगर्मी तेज़ हो गई। काफी जद्दोजहद करने के बाद पार्टी हाईकमान ने अंत में मुख्यमंत्री पद के लिए योगी आदित्यनाथ के नाम पर मोहर लगी। 19 मार्च 2017 को लखनऊ के कांशीराम स्मृति उपवन में योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के 21वें मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
कड़ाके की धूप में काम करने के बावजूद भी योगी सीएम आवास में बिना एसी के ही सोते है। अपने बयानो को लेकर योगी आदित्यनाथ काफी चर्चित रहते है, यही कारण है कि योगी की छवि एक हिन्दुत्वादी नेता के रूप में उभरकर सामने आयी। मुख्यमंत्री पद के अलावा इनके पास गृह, आवास, राजस्व, खाद्य और नागरिक आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और दवा प्रशासन, टिकट और रजिस्ट्री, टाउन और देश नियोजन विभाग, अर्थशास्त्र और सांख्यिकी सहित लगभग 36 मंत्रालयों का प्रभार है।



Friday, June 8, 2018

जानिए आखिर क्यों उत्तराखंड वासी हुए मुलायम की जान के प्यासे


क्या आप जानते है आखिर मुलायम सिंह यादव या उनके परिवार को उत्तराखंड क्यों नहीं आने दिया जाता है। अगर नहीं तो आज हम आपको बताते है इसके पीछे का राज। आखिर क्यों मुलायम चाह कर भी उत्तराखंड में अपने कदम नहीं रख सकते है।

इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री मुलायाम ने कुछ ऐसा कर दिया..
दरअसल ये उस समय की बात है,जब उत्तराखंड उत्तरप्रदेश का ही हिस्सा हुआ करता थाऔर यहां के मुख्यमंत्री मुलायाम सिंह यादव हुआ करते थे। लेकिन इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री मुलायाम ने कुछ ऐसा कर दिया जिससे वो उत्तराखंड वासियों की नज़रो में विलन बन गए।

प्रदर्शनकारी उत्तरप्रदेश के मुजफ्फनगर जिले के..
दरअसल मुलायम रामपुर तिराहा गोलीकांड के कारण ही उत्तराखण्ड के विलेन बन गए। 2अक्टूबर सन 1994 यानि गांधी जंयती के दिन की रामपुर तिराहा गोलीकांड हुआ थाजिसमे उत्तराखण्ड की मांग कर रहे हजारो उत्तराखण्ड आंदोलनकारियों पर सपा सरकार ने लाठीचार्ज और गोलीबारी करवा दी। जब प्रदर्शनकारी उत्तरप्रदेश के मुजफ्फनगर जिले के रामपुर क्रॉसिंग को पार कर रहे थे तब उन पर मुलायम सरकार ने गोली चलवा दी थी। आपको बता दे कि ये प्रदर्शनकारी दिल्ली में धरना देने जा रहे थे।  इनकी मांग पर्वतीय क्षेत्रों के विकास से जुड़ी थी। इस घटना में 7 लोगों की मृत्यु हो गई जबकि 10 से ज्यादा आंदोलनकारी घायल हुए। और 400 से ज्यादा आंदोलनकारियों को गिरफ्तार भी किया गया था ।

इस घटना की सबसे ज्यादा शर्मशार करने वाली बात..
इस घटना की सबसे ज्यादा शर्मशार करने वाली बात ये थी कि आंदोलन कर रही महिलाओं के साथ जबरन शारीरिक शोषण व दुष्कर्म करने की बात सामने आई थी जिस कारण देवभूमि के लोग  मुलायम सिंह यादव के खून के प्यासे हो गए  थे। उत्तराखण्ड के अनेक सामाजिक संगठनो ने सपा सरकार के इस फैसले की कड़ी निंदा की और सड़कों में एकत्र होकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दर्दनाक घटना को हुए 23 वर्ष बीत चुके है, परंतु सबूतों के कारण यह मामला अभी तक नैनीताल हाईकोर्ट में लंबित है। लेकिन 23 साल बीतने के बाद भी देवभूमि के लोगों के दिलों से ये बात नहीं निकली है और ना ही निकालनी  चाहिये।



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