DSVV का अद्भुत सफर :
जिस प्रकार हर एक दवाई की एक Expiry Date उसके बनाने के समय ही निर्धारित हो जाती हैं, वैसे ही जब मैं 11 अगस्त 2016 को मेरी Graduation की शिक्षा देव संस्कृति विश्विद्यालय के पवित्र प्रांगण में करने आया था, तब ही मेरे यहां से जाने का निर्धारण 2019 में हो गया था। इन तीन वर्षो में मैंने यहाँ की दिव्यता और पावनता को महसूस कर यह परिणाम निकला की यह विश्वविद्यालय शिक्षा का पावन मंदिर है।
सफर की शुरुआत कैसे हुई :
मुझे आज भी ध्यान हैं कि जब मैंने प्रथम बार देव संस्कृति विश्वविद्यालय का नाम अपने बुआ और फूफा जी के मुख से सुना था, तब मुझे संस्कृति शब्द सुनकर लगा कि, यहां सिर्फ संस्कृत को पढ़ाया जाता होगा, मैं यहां के लिए उचित नही हूँ और नाहि यह विश्वविद्यालय मेरे लिए उचित होगा, लेकिन मैं गलत साबित हुआ यहां शिक्षा के साथ संस्कार प्रदान किये जाते हैं।
Entrance Exam से Interview तक का सफर :
कहते हैं ना कि परमात्मा का जो आदेश होता हैं वही होता है, खेर समय का पहिया घूमा और 08 जुलाई 2016 को मुझे गुरुदेव और माता जी के आशीर्वाद से प्रवेश परीक्षा देने की सद्बुद्धि आयी और परीक्षा दी। 14 जुलाई को परीक्षा का परिणाम मेरे लिए Positive आया और मुझे अब 15 या 16 जुलाई में से किसी एक दिन आके Interview देना था, जोकि मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती थी क्योंकि मैंने कभी स्कूल के Viva के अतिरिक्त कभी इंटरव्यू नही दिया था। खेर 14 जुलाई की रात को जनरल डिब्बे में सामंजस्य बैठाकर अगली सुबह तेज़ बारिश में बिघते हुए इंटरव्यू देने पहुँच गया यूनिवर्सिटी।
मेरे अनुसार इंटरव्यू सही ही हुआ होगा क्योंकि पहली बार मे कुछ पता नही चलता कि सामने वाले गुरुजन क्या सोच रहे हैं मेरे बारे में। अब क्या मुझे 21 जुलाई तक का इंतजार था जब इंटरव्यू का भी परिणाम आने वाला था। ईश्वर की कृपा से वो तारीख भी आई और परिणाम से मैं खुश तो नही था लेकिन सन्तुष्ट हो सकता था। प्रवेश परीक्षा पास करके अलग अलग प्रान्तों के 30 होनहार विद्यार्थियों ने इंटरव्यू दिया था। इंटरव्यू के रिजल्ट मे मुझे दूसरी Waiting पर रखा गया यानी 15 सीट थी और मेरा नंबर 17वां। मन थोड़ा उदास था कि करूँ क्योंकि मेरी दिल से खूब इच्छा जग चुकी थी यहां प्रवेश लेने की परंतु अब क्या सबकी राय ली और Waiting Clear होने का इंतजार किया।
मैं सच मे यह सोच के घर जा रहा था कि अब यहाँ प्रवेश नही मिलेगा चलो बरेली जाकर वही Admission लेंगे। लेकिन जब 10 अगस्त को मेरे फ़ोन पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय से फ़ोन आया और ये कहा कि आपकी Waiting Clear हो गयी है, तो मेरी खुशी का ठिकाना नही था। मैं अपना जरूरत का सामान लेकर 10 की रात की ट्रेन से ही हरिद्वार जाने को निकल पड़ा। अगली सुबह वहा जाकर मैंने सारी Formalities पूरी करके वहा होस्टल में प्रवेश ले लिया।
Hostel का जीवन :
पहली बार होस्टल की अद्भुत life 11 अगस्त की रात से शुरू हुई जब मुझे Panini bhawan के दूसरे फ्लोर के C - Block में अपने बाकी साथियों के साथ अपना रहने का स्थान मिला। मुझे C - Block का 7 नंबर मिला था, लेकिन वहा एक महापुरुष पहले ही विराजमान थे केवल 3 नंबर खाली था। मैं अपने सामान के साथ वही पहुँच गया। वहा पहुँचकर बाकी साथियों से मुलाकात की और एक दूसरे के बारे में बताया। यह बहुत ही अकल्पनीय पल था मेरे लिए क्योंकि वहां बहुत सारे लोग मिलने आये थे। जिसमें
हमारे पत्रकारिता व योग के बड़े भईया लोग भी शामिल थे। उन सभी से कुछ देर बातचीत करके फिर विश्राम किया। पहली बार इतने Unknown लोगो के बीच सो रहा था, लेकिन ये सभी मित्र मेरे लिए जीवन भर के सहयोगी साबित होंगे इस आशा के साथ सके गया।
यज्ञ की Starting :
12 अगस्त 2016 को मैंने Dsvv Campus की यज्ञशाला में यज्ञ में आहुति डालते हुए देवताओं से अपने परिवार और समाज के असहाय लोगो की मदद के लिए प्राथना करी। पिछली रात होस्टल में ही मेरे मित्र भृगु,राजू और संतोष ने मुझे बता दिया था कि यह दैनिक यज्ञ होता है जिसमे हमे सम्मलित होना होता हैं। मुझे इस पावन कार्य की सूचना प्रदान करने के लिए आपका आभार मेरे मित्रों।
यह मेरे Dsvv के सफर की कहानी की शुरुआत हैं, आगे इन 3 वर्षो में बहुत यादगार लम्हे हैं, जिन्हें मैं और मेरी डायरी के पन्ने ही जानते हैं उनमें से कुछ को आपके सम्मुख करने के लिए प्रयासरत रहूंगा।
Dsvvain
Shubham Joshi
