चाणक्य की कूटनीति विफल...
जिस तरह का जनादेश देश की राजधानी दिल्ली के विधानसभा चुनाव में जनता ने दिया है, उसको देखते हुए लगता है, हमारे देश की जनता हर चुनाव में नाम पर वोट नहीं डालती, बल्कि नेताओं के काम का आकलन करके अपने मत का प्रयोग करती है। ये चुनाव परिणाम बीजेपी के दिग्गजों की बड़ी हार को दर्शाता है, क्योंकि जिस तरह बीजेपी ने अपनी पार्टी के तमाम केंद्रीय मंत्रियो से लेकर मुख्यमंत्रियो और सांसदों को मैदान में उतारकर उन्हें जनता के बीच उम्मीदवारों के लिए वोट मांगने भेजा था, लेकिन तमाम दिग्गज अपनी लोकप्रियता से लोगो के मन के वोट को नहीं बदल पाए.
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| अति आत्मविश्वास (Overconfidence) नहीं करना चाहिए था. |
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BJP के धार्मिक ध्रुवीकरण की हार...
दिल्ली के इस चुनाव में धार्मिक एजेंडा का भी बखूबी इस्तेमाल हुआ, चुनाव को बीजेपी के नेताओ ने हिंदुस्तान-पाकिस्तान का मैच बताकर लोगो को गुमराह करने की कोशिश की, साथ ही दिल्ली के विकास से ज्यादा राम मंदिर के नाम को लेकर जनता के बीच उतरी. यह साफ दर्शाता है की बीजेपी ने हर तरह के धार्मिक हथकंडे अपनाने का प्रयास किया परन्तु वह विफल रही. तीन तलाक़ पर मुस्लिम महिलाओं के साथ खड़ी होने वाली बीजेपी को शाहीन बाग का मुद्दा महंगा पर गया. बीजेपी के दिग्गजों ने केजरीवाल पर कभी आंतकवादी होने का आरोप लगाया तो कभी उन्हें अशुद्ध बताकर उनकी हनुमान भक्ति पर सवाल उठाया। इस तरह के धार्मिक ध्रुवीकरण खेलने के बावजूद भी बीजेपी की विजय नहीं हो पायी। यह जनता की जीत है, जनता किसी के नाम से ज्यादा किसी के काम को महत्व देती है. केजरीवाल सरकार पर लोगो की ये जीत और भरोसा दिल्ली के आने वाले पांच सालो को विकास के किस पायदान पर ले जायेगा ये देखने वाला होगा.
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| मोटा भाई का जादू विफल. |
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| आम मुख्यमंत्री. |
* 08 फरवरी को हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव
का परिणाम :
1. आम आदमी पार्टी - 62.
2. बीजेपी - 08.
3. कांग्रेस - 00.