क्या अब कांग्रेस होगी सशक्त.......
4 जुलाई को गाँधी परिवार के युवराज और कुछ समय के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का सेहरा पहनने वाले राहुल गाँधी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद से ही राजनीतिक पंडितो को सियासत के तवे पर पुनः रोटी सेकने का मौका मिल गया है. 2019 के लोकसभा चुनाव की हार का भार अपने कंधो पर लेते हुए कल राहुल गाँधी ने अपने टि्वटर अकाउंट से एक खत के माध्यम अपना इस्तीफा दिया था. जिसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में सियासी पारा तेज़ हो गया है. राहुल गाँधी के इस कठोर कदम के बाद भारतीय राजनीतिज्ञों के अनुसार यह कदम कांग्रेस पार्टी के लिए सकारात्मक साबित होगा. कोई राहुल के इस फैसले को हिम्मतवाला बता रहा है तो कोई हताशावाला. लेकिन बीजेपी ने इस घटनाक्रम पर चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष भले ही बदल जाए परंतु रिमोट तो गाँधी परिवार के पास ही रहेगा. फिलहाल Congress Working Committee (CWC) की बैठक में जल्द नए अध्यक्ष के नाम को लेकर फैसला हो सकता है. लेकिन अंतरिम अध्यक्ष के रुप में मोतीलाल वोरा को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है. अब यह देखना होगा कि काग्रेंस पार्टी की खराब हुई छवि को सुधारने और काग्रेंस का अस्तिव बचाये रखने का जिम्मा किसको दिया जाता है.

