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Wednesday, June 20, 2018

नेता मस्त और जनता पस्त : मज़ाक बनती जा रही है गठबंधन की राजनीति

 स्वार्थ का गठबंधन 
बीजेपी और कांग्रेस का विरोध पर सहययोगी दलो का समर्थन


राजनीति का मतलब होता है ऐसी नीतियों के आधार पर राज करना जिससे समाज के जन जन का विकास हो सके। परंतु वर्तमान राजनीतिक प्रणाली को देखकर लगता है कि तमाम राजनीतिक दलो की विचारधाराओं का अस्तिव ही खत्म हो गया है। इसका उदाहरण हम बीते कई दिनो से दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शन से लगा सकते है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल अनिल बैजल के खिलाफ भूख हड़ताल शुरू की थीए तो उनके इस विरोध को कई विपक्षी दलों के दिग्गज़ नेताओं ने समर्थन दिया।

कांग्रेस और बीजेपी का विरोध पर सहयोगियी पार्टियों का समर्थन 
कांग्रेस के सहययोगी दलो और बीजेपी सांसद का खुला समर्थन 
 कांग्रेस और भाजपा दोनो ही राष्ट्रीय राजनीतिक दलो की सूची में शामिल हैं। दोनो ही राजनीतिक दल केजरीवाल की इस हड़ताल का विरोध कर रहे है। लेकिन सबसे दिलचस्पी की बात ये कि  इन दोनो राजनीतिक दलो के सहयोगी दल केजरीवाल की इस हड़ताल का खुला समर्थन कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी की सहयोगी पार्टियां केजरीवाल के इस विरोध का समर्थन कर रही है उसमे पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांगे्रस (टीएमसी ) कर्नाटका की जनता दल ( जेडीएस ) कम्यनिस्ट पार्टी आॅफ इंडिया ( माक्र्सवादी ) और झारखण्ड मुक्ति दल ( जेएमडी ) शामिल है। वहीं भारतीय जनता पार्टी जो कि वर्तमान समय में सबसे लोकप्रिय पार्टी की श्रेणी में शामिल है। पीएम मोदी केजरीवाल के इस गतिरोध पर चुप्पी साधे हुए है वहीं उनकी पार्टी के दिल्ली के कद्दावर नेता सीएम कार्यालय के बाहर बैठकर धरना दे रहे है। लेकिन भाजपा के सांसद और पूर्व कैबिनेट मंत्री शत्रुघन सिन्हा केजरीवाल के समर्थन मे ट्वीट कर रहें है। भाजपा नेताओं के साथ उनके सहयोगी दलो के नेताओं ने भी केजरीवाल के विरोध का समर्थन करना शुरू कर दिया हैं। शिवसेना प्रमुख उध्दव ठाकरे और जनता दल यूनाइटेड से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी केजरीवाल के पक्ष में बात कही।

विपक्षी पार्टियों को सरकार बनाने से रोकना होता है मकसद
विभिन्न विचाधाराओं और सिंद्धातो के बावजूद जब राजनीतिक पार्टियां अपने विपक्षी को सरकार बनाने से रोकने के लिए मिलती है। तो लगता है दोनो के बीच का ये गठबंधन एक मजबूत सरकार बनाकर जनता का विकास करेगा। लेकिन इन सब बातों को देखकर तो यही लगता है कि राजनीतिक पार्टियां सरकार बनाने के लिए जोड़ . तोड तो आसानी से कर लेती है ए लेकिन आपसी संचार को स्थापित करने में असफल रहती है। राजनीतिक दल अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए दूसरी पार्टी की विचारधाराओं से गठबंधन करके एक दूसरे की जरूरतो को पूरा तो कर लेते है पर देशहित के मुद्दो पर एकता नही दिखाते है। 

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