आज हम आपको उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री और गोरखपुर के पूर्व सांसद योगी आदित्यनाथ के जीवन से जुड़े कुछ ऐसे वाख्या बताएंगे जिन्होने उनके जीवन को बदल दिया। सरलता और सादगी से जीवन जीने वाले योगी आदित्यनाथ का जन्म 05 जून 1972 को उत्तराखण्ड के पौड़ी जिले की यमकेश्वर तहसील के पंचुर गांव में हुआ था। योगी गढ़वाली राजपूत परिवार से थे। योगी आदित्यनाथ का वास्तविक नाम अजय सिंह बिष्ट है। इनके पिता आनंद सिंह बिष्ट वन विभाग में रेंजर थे और माता सावित्री देवी गृहणी। इनके माता -पिता की सात संताने थी जिसमे योगी पांचवी संतान हैं।
योगी ने किन किन स्कूला व विश्वविद्यालयों में की पढ़ाई
योगी की प्रांरभिक शिक्षा टिहरी के गजा
स्थानीय स्कूल से हुई जहां से इन्होंने दसवीं तक ही शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद
सन् 1989 में ये ऋषिकेश आ गए जहां श्री भरत मन्दिर इण्टर कॉलेज से
इन्होंने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। सन् 1992
में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित में बीएससी की परीक्षा पास
की। कोटद्वार में रहने के दौरान इनके कमरे से सामान चोरी हो गया था जिसमें इनके
सनत प्रमाण पत्र भी थे। इस कारण से गोरखपुर से विज्ञान स्नातकोत्तर करने का इनका
प्रयास असफल रह गया। इसके बाद इन्होंने ऋषिकेश में पुनः विज्ञान स्नातकोत्तर में
प्रवेश तो लिया लेकिन राम मंदिर आंदोलन का प्रभाव और प्रवेश को लेकर परेशानी से
उनका ध्यान अन्य ओर बंट गया। 1993 में गणित में एमएससी की पढ़ाई के दौरान गुरु गोरखनाथ पर शोध करने
ये गोरखपुर आए एवं गोरखपुर प्रवास के दौरान ही ये महंत अवैद्यनाथ के संपर्क में आए
थे जो इनके पड़ोस के गांव के निवासी और परिवार के पुराने परिचित थे। अंततः ये महंत
की शरण में ही चले गए और दीक्षा ले ली।
कैसे इनका नाम योगी पड़ा
योगी आदित्यानाथ के नाम को लेकर काफी
सरगर्मी भी रहती है, दरअसल योगी का वास्तविक नाम अजय सिंह बिष्ट है। इनका नाम योगी
पढ़ने के पीछे भी एक कहानी है,
आपको बता दे कि जब योगी अपना घर बार छोड़
के गोरखपुर के गोरखनाथ मठ में आए थे। महज 22 वर्ष की उम्र इनको मंहत
अवैद्यनाथ ने अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया, जिसके
बाद से ही इन्हे योगी के नाम से जाना जाने लगा।
योगी और भगवा रंग
भगवा या केसरिया रंग सूबे के मुख्यमंत्री
को बहुत ही पसंद है। इसका पता उनके वस्त्रो से साफ पता चलता है। इतने बड़े राज्य के
मुख्यमंत्री होने के बावजूद भी योगी रोज़ाना भगवा रंग के वस्त्रों को धारण करके सभी
कार्य करते हैं। यूपी के मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी ने यूपी के अधिकतर जगहों को
भगवा रंग की चादर पहना दी है।
योगी को क्या है पसंद
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बचपन पहाड़ो
मे ही बीता है, योगी को तैराकी में काफी दिलचस्पी है। बचपन से ही योगी अपने गांव
पंचुर की नदियों में तैरने का शौक रखते थे। तैराकी के अलावा योगी को बैडमिटंन
खेलना व पशुओं के साथ बातचीत करने में इनकी मुख्य अभिरूचि है। खाने मे इन्हें गाहद
पंसद है, जोकि पर्वतीय क्षेत्रों में बनाया जाता हैं। कैसे हुआ योगी का राजनीतिक गलियारो में प्रवेश
योगी आदित्यनाथ का राजनीति के गलियारों मे
प्रवेश सन् 1990 में हुआ। जब इन्होंने अयोध्या राम मंदिर आंदोलन मे प्रतिभाग
करने के लिए अपना घर - बार छोड़ दिया था। इसके बाद जब इन्होंने 1998
में 26 वर्ष की आयु में पहली बार बारहवी लोकसभा के लिए गौरखपुर सीट से
चुनाव लड़कर के सबसे युवा सांसद चुने गए ।
योगी ने हिन्दु युवा वाहिनी और युवा संगठन संस्था की स्थापना की। 12
सितंबर 2014 को गोरखनाथ मंदिर के महन्त अवैद्यनाथ जी के ब्रह्मलीन होने के
बाद इन्हें यहाँ का महंत बनाया गया। मंहत बनने के 2
दिन बाद इन्हें नाथ पंथ के पारंपरिक अनुष्ठान के अनुसार मठ का पीठाधीश्वर बनाया
गया।
उत्तर प्रदेश 2017
विधानसभा चुनावो मे भारतीय जनता पार्टी की पूर्णता बहुमत साबित होने के बाद
केंद्रीय विधान मण्डल में यूपी की बागडोर किसके हाथों में देनी है इसको लेकर
सरगर्मी तेज़ हो गई। काफी जद्दोजहद करने के बाद पार्टी हाईकमान ने अंत में
मुख्यमंत्री पद के लिए योगी आदित्यनाथ के नाम पर मोहर लगी। 19
मार्च 2017 को लखनऊ के कांशीराम स्मृति उपवन में योगी आदित्यनाथ ने उत्तर
प्रदेश के 21वें मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
कड़ाके की धूप में काम करने के बावजूद भी
योगी सीएम आवास में बिना एसी के ही सोते है। अपने बयानो को लेकर योगी आदित्यनाथ
काफी चर्चित रहते है, यही कारण है कि योगी की छवि एक हिन्दुत्वादी नेता के रूप में
उभरकर सामने आयी। मुख्यमंत्री पद के अलावा इनके पास गृह, आवास, राजस्व, खाद्य
और नागरिक आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और दवा प्रशासन, टिकट
और रजिस्ट्री, टाउन और देश नियोजन विभाग, अर्थशास्त्र और सांख्यिकी
सहित लगभग 36 मंत्रालयों का प्रभार है।

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