मौन हो गई अटल वाणी
16 अगस्त का दिन भारतीयों के लिये गम का दिन साबित हुआ। इस दिन देश ने एक महान राजनीतिज्ञ को ही नही बल्कि एक कवि, लेखक, पत्रकार और प्रखर वक्ता, को हमेशा हमेशा के लिए खो दिया। भारतीय राजनीति के भीष्म पितामह यानी आदरणीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी अब हमारे बीच मे नही रहे। 25 दिसंबर को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में जन्मे अटल जी का व्यकितत्व बहुत विराट था,उन्होंने सदैव देश के नागरिकों के हित में ही निर्णय लिए। वह पूर्णता देशवासियों के लिए समर्पित थे । आज भले ही वो हमारे साथ स्थूल रूप में नही हैं परंतु वे सदैव हमारे साथ सूक्ष्म रूप में हम सभी भारतीयों के दिलो में जिंदा हैं और सदैव रहेंगे। अटल जी देश के उन चुनिंदा राजनेताओं में से एक थे जिनकी वाणी को संसद में विपक्षी दलों के नेता भी शांत होकर सुनते थे। संसद में अपनी प्रेणादायक कविता के माध्यम से देश को सहजता से विकास का चश्मा दिखातें थे। देश का एक ऐसा प्रधानमंत्री जिसने देश को उच्चतम शिखर तक पहुचाने के लिए सदैव अटल सोच के साथ प्रयास किया। अटल जी आज कल और जब तक ये संसार हैं तब तक हम सभी के हृदय में जीवित हैं।
अटल जी के हृदय प्रेमी स्वभाव को देखते हुए ये कहना चाहूंगा कि :-
" शालीनता बिना मोल मिलती है परंतु इससे सब कुछ खरीदा जा सकता है "

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